पटना उच्च न्यायालय का निर्णय: आई.जी.आई.सी निदेशक की नियुक्ति पर 2023 के संशोधन को वैध ठहराया — 2025

निर्णय की सरल व्याख्या

पटना उच्च न्यायालय ने इंदिरा गांधी हृदय रोग संस्थान (IGIC), पटना के निदेशक की नियुक्ति से संबंधित बिहार सरकार के 2023 के संशोधित नियमों को सही और वैध ठहराया है।
यह निर्णय 21 फरवरी 2025 को माननीय कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश और माननीय न्यायमूर्ति पार्थ सारथी की खंडपीठ ने दिया।

इस याचिका में एक चिकित्सक (याचिकाकर्ता) ने यह चुनौती दी थी कि बिहार इंदिरा गांधी हृदय रोग संस्थान (सेवा नियमावली) संशोधन, 2023 के नियम 5, 6 और परिशिष्ट-1 संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 का उल्लंघन करते हैं। उनका आरोप था कि सरकार ने निदेशक पद की योग्यता घटाकर और चयन पद को पदोन्नति पद में बदलकर यह संशोधन किया ताकि किसी विशेष व्यक्ति को लाभ दिया जा सके।

पृष्ठभूमि

IGIC को वर्ष 1980 में पटना मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल से अलग कर एक स्वतंत्र राज्य स्तरीय हृदय रोग संस्थान बनाया गया था। पहले यह संस्थान शिक्षण संस्थान के रूप में था, लेकिन 1984 में सरकार ने इसे गैर-शिक्षण (non-teaching) संस्थान घोषित कर दिया ताकि चिकित्सा सेवाएं और संचालन अधिक प्रभावी ढंग से हो सकें।

वर्ष 2014 के नियमों के तहत IGIC में निदेशक का पद चयन पद (Selection Post) था। इस पद के लिए MD के साथ DM (Cardiology) या MS के साथ MCh (Cardio-thoracic Surgery) की योग्यता आवश्यक थी, साथ ही किसी मान्यता प्राप्त हृदय रोग संस्थान में 15 वर्ष का अनुभव भी जरूरी था।

वर्ष 2022 के नियमों में सरकार ने चयन एजेंसी को BPSC से बदलकर BTSC कर दिया और अनुभव की शर्तों में थोड़ी ढील दी, लेकिन योग्यता वही रखी गई।

फिर वर्ष 2023 के संशोधन में सबसे बड़ा बदलाव किया गया —

  • निदेशक का पद अब चयन से नहीं बल्कि पदोन्नति (Promotion) से भरा जाएगा।
  • निदेशक के लिए अब केवल MD (Medicine) या DM (Cardiology) या MS या MCh (CTVS) में से कोई एक डिग्री और 15 वर्ष का अनुभव पर्याप्त है।
  • नियुक्ति सरकार द्वारा की जाएगी, और पात्रता वरिष्ठता (inter se seniority) के आधार पर तय होगी।

याचिकाकर्ता की दलीलें

  1. IGIC एक सुपर-स्पेशियलिटी कार्डियक इंस्टीट्यूट है, जहाँ सहायक निदेशक तक के लिए DM या MCh की अनिवार्यता है। ऐसे में निदेशक पद की योग्यता घटाना अवैज्ञानिक और अनुचित है।
  2. मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (अब NMC) के नियमों के अनुसार ऐसे संस्थानों के प्रमुख के पास सुपर-स्पेशियलिटी डिग्री होना आवश्यक है।
  3. यह संशोधन किसी व्यक्ति विशेष को लाभ देने के उद्देश्य से किया गया, क्योंकि पहले से चल रही चयन प्रक्रिया में याचिकाकर्ता पात्र थे।

राज्य सरकार और NMC की दलीलें

बिहार सरकार ने कहा कि IGIC एक अस्पताल है, मेडिकल कॉलेज नहीं।
इसलिए मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (MCI) या नेशनल मेडिकल कमिशन (NMC) के टीचिंग क्वालिफिकेशन नियम इस पर लागू नहीं होते।
निदेशक का पद एक प्रशासनिक पद है, न कि शिक्षण पद, इसलिए योग्यता में अंतर होना स्वाभाविक है।

NMC ने अपने शपथपत्र में स्पष्ट किया कि उसके नियम केवल मेडिकल कॉलेजों में शिक्षकों की नियुक्ति के लिए हैं, अस्पतालों के लिए नहीं।
IGIC जैसे गैर-शिक्षण संस्थानों में नियुक्ति का निर्णय राज्य सरकार अपने नियमों के तहत कर सकती है।

न्यायालय का विश्लेषण

न्यायालय ने यह दोहराया कि किसी नियम को असंवैधानिक ठहराने के लिए बहुत ठोस कारण होना चाहिए, जैसे कि—

  • राज्य के पास अधिकार न होना,
  • मौलिक अधिकारों का उल्लंघन होना,
  • या नियम मनमाने और विवेकहीन होना।

न्यायालय ने कहा कि:

  1. IGIC एक गैर-शिक्षण अस्पताल है, इसलिए NMC के “टीचिंग स्टाफ क्वालिफिकेशन नियम” यहाँ लागू नहीं होते।
  2. DNB (Diplomate of National Board) मान्यता होने से यह मेडिकल कॉलेज नहीं बन जाता। देश में कई निजी अस्पतालों के पास भी DNB मान्यता होती है।
  3. निदेशक का कार्य प्रशासनिक और नीति निर्धारण का होता है, जबकि रोगी उपचार और विशेषज्ञ सेवाएं सुपर-स्पेशलिस्ट चिकित्सक ही प्रदान करते हैं। इसलिए निदेशक के लिए सुपर-स्पेशियलिटी डिग्री अनिवार्य न होना अनुचित नहीं कहा जा सकता।
  4. यदि सरकार किसी चयन प्रक्रिया के समाप्त होने से पहले नियम बदल देती है, तो वह नियम वैध रहता है — क्योंकि यह नीति-निर्माण का अधिकार है।

अंततः, न्यायालय ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि राज्य सरकार 2023 के नियमों के अनुसार ही निदेशक की नियमित नियुक्ति करे, न कि अस्थायी या संविदा पर।

निर्णय का महत्व और इसका प्रभाव

यह निर्णय बिहार सरकार और अन्य राज्यों के लिए एक महत्वपूर्ण उदाहरण है। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि —

  • राज्य सरकार अपने स्वतंत्र अस्पतालों और संस्थानों के लिए अलग सेवा नियम बना सकती है, जिन पर मेडिकल कॉलेजों के अध्यापक नियम लागू नहीं होंगे।
  • केवल DNB मान्यता मिलने से कोई अस्पताल “मेडिकल इंस्टीट्यूशन” नहीं बन जाता।
  • वरिष्ठता और प्रशासनिक अनुभव के आधार पर पदोन्नति करना संविधान के अनुच्छेद 14 या 16 का उल्लंघन नहीं है।
  • नीति बनाना सरकार का कार्य है, और अदालतें केवल उसकी वैधता देखती हैं, न कि उसका औचित्य।

इस निर्णय से IGIC के कर्मचारियों को यह स्पष्ट संदेश मिला कि अब निदेशक की नियुक्ति अंदरूनी पदोन्नति से होगी, जिससे संस्थान में स्थिरता और दीर्घकालिक अनुभव का लाभ मिलेगा।
साथ ही, न्यायालय ने सरकार को निर्देश दिया कि निदेशक का पद अब स्थायी रूप से नियमित नियुक्ति से भरा जाए, ताकि प्रशासनिक अनिश्चितता समाप्त हो।

कानूनी मुद्दे और निर्णय

  • राज्य सरकार की योग्यता तय करने की शक्ति (अनुच्छेद 309): वैध मानी गई। IGIC गैर-शिक्षण अस्पताल है।
  • NMC नियमों से टकराव का आरोप: अस्वीकार। NMC नियम केवल शिक्षण संस्थानों पर लागू होते हैं।
  • सुपर-स्पेशियलिटी योग्यता हटाना अनुच्छेद 14, 16 का उल्लंघन है या नहीं: नहीं, निदेशक का कार्य प्रशासनिक है।
  • चयन से पदोन्नति में परिवर्तन: सरकार का नीतिगत निर्णय, कानूनी रूप से वैध।
  • पुराने चयन प्रक्रिया (BPSC) पर प्रभाव: नियम बदलने से पहले चयन पूरा नहीं हुआ था, इसलिए नया नियम लागू रहेगा।

पार्टियों द्वारा संदर्भित निर्णय

  • Shudhir & Anr. v. State of Kerala & Ors., (2015) 6 SCC 685 — याचिकाकर्ता ने इस निर्णय का हवाला दिया कि पात्रता शर्तें मनमाने ढंग से नहीं घटाई जा सकतीं।

न्यायालय द्वारा उपयोग में लाए गए निर्णय

  • State of Tamil Nadu v. P. Krishnamurthy, (2006) 4 SCC 517 — अधीनस्थ कानूनों की वैधता जांचने के सिद्धांत।
  • In Re: Section 6A of the Citizenship Act, 1955, 2024 SCC OnLine SC 2880 — नीति और न्यायिक समीक्षा के दायरे पर निर्देश।

मामले का शीर्षक

डॉ. संदीप कुमार बनाम बिहार राज्य

केस नंबर

Civil Writ Jurisdiction Case No. 15400 of 2023

उद्धरण (Citation)

2025 (2) PLJR 189

न्यायमूर्ति गण का नाम

माननीय कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश एवं माननीय श्री न्यायमूर्ति पार्थ सारथी

वकीलों के नाम और किनकी ओर से पेश हुए

  • याचिकाकर्ता की ओर से: श्री कुमार कौशिक, अधिवक्ता
  • राज्य की ओर से: श्री पी.के. शाही, महाधिवक्ता; श्री डी.के. सिन्हा, वरिष्ठ अधिवक्ता; श्री अभिनय राज, अधिवक्ता; श्री अलेक्ज़ेंडर अशोक, अधिवक्ता

निर्णय का लिंक

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