पटना हाई कोर्ट का फैसला: पंचायत शिक्षक की गलत नियुक्ति रद्द, योग्यता और मेरिट को प्राथमिकता (2022)

निर्णय की सरल व्याख्या

पटना हाई कोर्ट ने Letters Patent Appeal No. 376 of 2022 में 30 अगस्त 2022 को एक महत्वपूर्ण निर्णय दिया। अदालत ने कहा कि अगर किसी व्यक्ति की नियुक्ति मेरिट लिस्ट को दरकिनार कर की गई है, तो वह नियुक्ति अवैध (illegal) मानी जाएगी — चाहे वह व्यक्ति कई सालों से नौकरी कर रहा हो।

यह फैसला माननीय न्यायमूर्ति पी. बी. बजंथरी और माननीय न्यायमूर्ति राजीव राय की पीठ ने सुनाया। अदालत ने सिंगल बेंच (माननीय न्यायमूर्ति संजीव प्रकाश शर्मा) के आदेश को बरकरार रखा, जिसने एक पंचायत शिक्षक की नियुक्ति को रद्द कर दिया था।

मामले की पृष्ठभूमि

यह मामला नवादा जिले के गोविंदपुर प्रखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत राज बुधवारा का है। बिहार प्राथमिक शिक्षक नियुक्ति नियमावली, 2006 के तहत पंचायत शिक्षकों की बहाली के लिए विज्ञापन निकाला गया था।

आवेदनों की जांच के बाद मेरिट लिस्ट और वेटिंग लिस्ट बनाई गई।

  • वादी (प्रभात कुमार) का नाम मेरिट लिस्ट में सीरियल नंबर 12 पर था, उसके अंक 69.44% थे।
  • अपीलकर्ता (संतोष कुमार) और नंद कुमार का नाम वेटिंग लिस्ट में सीरियल नंबर 2 और 3 पर था, जिनके अंक क्रमशः 67.00% और 66.74% थे।

इसके बावजूद पंचायत चयन समिति ने मुख्य मेरिट लिस्ट को नजरअंदाज करते हुए वेटिंग लिस्ट से दो उम्मीदवारों — संतोष कुमार और नंद कुमार — को नियुक्त कर दिया। बाद में नंद कुमार ने नौकरी छोड़ दी, लेकिन संतोष कुमार कार्यरत रहे।

वहीं, मेरिट में ऊपर रहने वाले प्रभात कुमार को नियुक्ति पत्र तक नहीं दिया गया। उसने 2007 से लेकर 2022 तक लगातार न्याय के लिए अदालतों के चक्कर लगाए।

कार्यवाही का पूरा क्रम

  1. 2008: प्रभात कुमार ने पहली बार हाई कोर्ट में रिट दायर की (CWJC No. 2575/2008)। कोर्ट ने कहा कि वे अपना प्रतिनिधित्व (representation) दें।
  2. 2009: ब्लॉक विकास पदाधिकारी (BDO) ने जांच कर संतोष कुमार और नंद कुमार की नियुक्ति रद्द कर दी।
  3. 2011 और 2014: हाई कोर्ट ने कहा कि अब BDO के पास अधिकार नहीं है क्योंकि जिला शिक्षक नियोजन अपीलीय प्राधिकारी (District Teachers Appellate Authority) बन चुका है।
  4. 2014–2017: जिला और राज्य अपीलीय प्राधिकारियों ने प्रभात कुमार की अपील खारिज कर दी।
  5. 2018: प्रभात कुमार ने एक और रिट (CWJC No. 658/2018) दायर की। इस पर 5 जुलाई 2022 को सिंगल बेंच ने उनके पक्ष में फैसला दिया और गलत नियुक्तियों को रद्द कर दिया।

इसके खिलाफ संतोष कुमार ने यह एल.पी.ए. (Letters Patent Appeal) दायर की।

दोनों पक्षों के तर्क

अपीलकर्ता (संतोष कुमार) का तर्क:

  • सरकार ने 30.11.2007 तक बहाली पूरी करने की अंतिम तिथि तय की थी।
  • प्रभात कुमार ने समय पर अपने मूल प्रमाण पत्र नहीं जमा किए, इसलिए वेटिंग लिस्ट के उम्मीदवारों को मौका दिया गया।
  • वह 2007 से काम कर रहे हैं, इसलिए उनकी सेवा बरकरार रखी जानी चाहिए।
  • जिला और राज्य अपीलीय प्राधिकारियों ने भी उनके पक्ष में फैसला दिया था।

उत्तरदाता (प्रभात कुमार) का तर्क:

  • रिकॉर्ड में कहीं यह नहीं लिखा है कि उसे प्रमाण पत्र जमा करने को कहा गया था या उसने मना किया।
  • चयन समिति ने बिना वजह मेरिट लिस्ट को नजरअंदाज किया और वेटिंग लिस्ट से लोगों को बहाल कर दिया, जो पूरी तरह अवैध था।

पटना हाई कोर्ट की टिप्पणियाँ और निष्कर्ष

द्वैध पीठ (Division Bench) ने चयन समिति के रिकॉर्ड की गहन जांच की और पाया—

  • मेरिट लिस्ट में प्रभात कुमार के नाम के आगे कोई टिप्पणी नहीं थी कि उन्हें कब प्रमाण पत्र देने को कहा गया या उन्होंने जमा नहीं किए।
  • बिना किसी कारण वेटिंग लिस्ट से उम्मीदवारों को नियुक्त करना पूरी तरह गैरकानूनी था।
  • “कन्सेंट लेटर” लेने का तर्क निराधार था, क्योंकि मेरिट लिस्ट में शामिल उम्मीदवारों को पहले मौका दिया ही नहीं गया था।
  • जिला और राज्य अपीलीय प्राधिकारियों ने भी बिना तथ्यों की जांच किए गलत आदेश पारित किए।

अदालत ने यह भी कहा कि ऐसी अनियमितताएँ केवल एक पंचायत तक सीमित नहीं हैं — बिहार के कई ग्राम पंचायतों में ऐसी ही गड़बड़ियाँ हुई हैं, जहाँ मेरिट को नजरअंदाज कर मनचाहे लोगों को नौकरी दी गई।

अदालत का फैसला

  • हाई कोर्ट ने सिंगल बेंच के आदेश को पूरी तरह बरकरार रखा।
  • अदालत ने कहा कि अपीलकर्ता की नौकरी अवैध तरीके से प्राप्त की गई थी, इसलिए वह यह नहीं कह सकता कि कई साल सेवा करने से अब उसे हटा नहीं सकते।
  • सुप्रीम कोर्ट के निर्णय M.S. Patil (Dr.) v. Gulbarga University, (2010) 10 SCC 63 का हवाला देते हुए कहा गया कि “लंबे समय तक गलत नियुक्ति पर काम करना किसी को कानूनी हक नहीं देता।”
  • संतोष कुमार की नियुक्ति रद्द कर दी गई।
  • राज्य सरकार को निर्देश दिया गया कि सिंगल बेंच के आदेश को तुरंत लागू करे।

निर्णय का महत्व और प्रभाव

  • यह फैसला पंचायत शिक्षक भर्ती में मेरिट को सर्वोपरि मानने का स्पष्ट संदेश देता है।
  • पंचायत स्तर की चयन समितियों — मुखिया, पंचायत सचिव, और जिला कार्यक्रम पदाधिकारी — को अब जवाबदेह ठहराया गया है।
  • अदालत ने यह भी कहा कि गलत बहाली पर खर्च हुआ वेतन संबंधित अधिकारियों और पंचायत पदाधिकारियों से वसूला जा सकता है।
  • यह निर्णय उन उम्मीदवारों के लिए आशा की किरण है जिन्हें उच्च मेरिट के बावजूद न्याय नहीं मिला।
  • यह फैसला सरकारी भर्ती में पारदर्शिता और उत्तरदायित्व को मजबूत करता है।

कानूनी मुद्दे और निर्णय (बुलेट में)

  • क्या वेटिंग लिस्ट से नियुक्ति मेरिट लिस्ट को नजरअंदाज करके की जा सकती है?
    ❌ नहीं, यह पूरी तरह अवैध है जब तक मुख्य लिस्ट के उम्मीदवार ज्वाइन नहीं करने से मना करें।
  • क्या लंबे समय तक नौकरी करने से अवैध नियुक्ति वैध हो सकती है?
    ❌ नहीं, गलत नियुक्ति कभी वैध नहीं होती, चाहे व्यक्ति वर्षों से कार्यरत हो।
  • क्या जिला और राज्य अपीलीय प्राधिकारी का फैसला सही था?
    ❌ नहीं, उन्होंने तथ्यों की जांच किए बिना फैसला दिया।
  • क्या गलत वेतन की वसूली संभव है?
    ✅ हाँ, संबंधित पंचायत प्रतिनिधियों और अधिकारियों से राशि वसूली जाएगी।

पार्टियों द्वारा संदर्भित निर्णय

M.S. Patil (Dr.) v. Gulbarga University & Ors., (2010) 10 SCC 63

मामले का शीर्षक

संतोष कुमार बनाम बिहार राज्य एवं अन्य

केस नंबर

Letters Patent Appeal No. 376 of 2022
(सिविल रिट जुरिस्डिक्शन केस नंबर 658 ऑफ 2018)

उद्धरण (Citation)

2023 (1) PLJR 75

न्यायमूर्ति गण का नाम

माननीय न्यायमूर्ति पी. बी. बजंथरी
माननीय न्यायमूर्ति राजीव राय

वकीलों के नाम और किनकी ओर से पेश हुए

  • अपीलकर्ता की ओर से: श्री वाई. वी. गिरी (वरिष्ठ अधिवक्ता), श्री अजय कुमार पांडेय
  • उत्तरदाताओं की ओर से: श्री कृष्णकांत सिंह

निर्णय का लिंक

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