पटना हाई कोर्ट का फैसला: अनुबंध पर नियुक्त दंत चिकित्सक की सेवा समाप्त (2021)

निर्णय की सरल व्याख्या

यह मामला बिहार के बेगूसराय ज़िले के एक दंत चिकित्सक से जुड़ा है, जिन्हें रेफ़रल अस्पताल, मंझौल में वर्ष 2006 में अनुबंध (contract) पर नियुक्त किया गया था। उनकी सेवा कई बार बढ़ाई गई और वह लगभग 14 वर्षों तक काम करते रहे।

फरवरी 2020 में जिला स्वास्थ्य समिति, बेगूसराय ने उनका अनुबंध समाप्त कर दिया। डॉक्टर ने हाई कोर्ट में याचिका दायर की और कहा कि:

  • उन्हें बिना कोई कारण बताए और बिना नोटिस दिए सेवा से हटा दिया गया।
  • यह प्राकृतिक न्याय (Natural Justice) का उल्लंघन है।
  • जिस पद पर वे काम कर रहे थे, उस पर अभी तक कोई नियमित नियुक्ति नहीं हुई है।

सरकार की ओर से जवाब यह था कि –

  • डॉक्टर की नियुक्ति केवल अनुबंध पर हुई थी।
  • बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) ने 543 दंत चिकित्सकों की नियमित नियुक्ति कर दी है।
  • मंझौल अस्पताल में जिस पद पर याचिकाकर्ता काम कर रहे थे, वह कोई स्वीकृत (sanctioned) पद नहीं था।
  • इस कारण से सभी अनुबंध पर नियुक्त डॉक्टरों को हटाने का निर्णय लिया गया।

कोर्ट का निर्णय:
माननीय न्यायाधीश ने कहा कि अनुबंध आधारित नियुक्ति में अधिकार केवल अनुबंध तक सीमित होते हैं। यह नियुक्ति कभी भी स्थायी नियुक्ति का अधिकार नहीं देती। यदि अनुबंध की शर्तों का उल्लंघन होता है तो उसका उपाय (remedy) सामान्य सिविल कानून के तहत है, न कि अनुच्छेद 226 के तहत दायर की गई रिट याचिका में।

इसलिए याचिका खारिज कर दी गई। लेकिन कोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि डॉक्टर चाहें तो सामान्य सिविल अदालत में अनुबंध उल्लंघन का दावा कर सकते हैं।

निर्णय का महत्व और इसका प्रभाव आम जनता या सरकार पर

  1. अनुबंध आधारित कर्मचारियों की स्थिति स्पष्ट हुई – यह फैसला दिखाता है कि अनुबंध पर काम करने वालों को स्थायी नौकरी का कोई अधिकार नहीं होता।
  2. स्वास्थ्य क्षेत्र पर असर – बिहार जैसे राज्यों में बहुत से डॉक्टर व दंत चिकित्सक अनुबंध पर काम करते हैं। यह फैसला बताता है कि उनकी सेवा सरकार की नीतियों और नियमित नियुक्ति की प्रक्रिया पर निर्भर है।
  3. रिट याचिका की सीमा तय हुई – अनुबंध संबंधी विवादों में सीधे हाई कोर्ट की शरण नहीं ली जा सकती। ऐसे मामलों के लिए सामान्य कानून का रास्ता अपनाना होगा।
  4. नीति निर्माण में मार्गदर्शन – सरकार को भी यह स्पष्ट संदेश है कि अनुबंध पर नियुक्तियों का उपयोग केवल अस्थायी उपाय के रूप में किया जाए और नियमित नियुक्ति प्रक्रिया को प्राथमिकता दी जाए।

कानूनी मुद्दे और निर्णय

  • क्या बिना नोटिस अनुबंध समाप्त करना प्राकृतिक न्याय का उल्लंघन है?
    ✔ कोर्ट ने कहा – नहीं, क्योंकि यह अनुबंध आधारित पद था और नियमित सरकारी नौकरी नहीं थी।
  • क्या अनुबंध आधारित कर्मचारी स्थायी नियुक्ति या सेवा जारी रखने का अधिकार रखता है?
    ✘ नहीं। अनुबंधित कर्मचारी को ऐसा कोई अधिकार नहीं है।
  • क्या अनुबंध विवादों को रिट याचिका से हल किया जा सकता है?
    ✘ नहीं। ऐसे मामलों का समाधान सामान्य सिविल अदालत में किया जा सकता है।

मामले का शीर्षक

डॉ. कुंदन कुमार बनाम बिहार राज्य एवं अन्य

केस नंबर

Civil Writ Jurisdiction Case No. 6922 of 2020

उद्धरण (Citation)

2021(2) PLJR 112

न्यायमूर्ति गण का नाम

माननीय न्यायमूर्ति प्रभात कुमार सिंह

वकीलों के नाम और किनकी ओर से पेश हुए

  • याचिकाकर्ता की ओर से: श्री कृष्णकांत सिंह, अधिवक्ता; श्री चन्दन कुमार कश्यप, अधिवक्ता
  • प्रतिवादी राज्य की ओर से: श्री पंकज कुमार, स्टैंडिंग काउंसिल 12; श्री कमलेश किशोर, AC टू SC-12

निर्णय का लिंक

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