बिना कानूनी प्रक्रिया अपनाए पीडीएस डीलर को हटाना गलत: पटना हाई कोर्ट का फैसला

निर्णय की सरल व्याख्या

पटना हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में सरकार द्वारा एक सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) डीलर को बिना किसी जांच या सूचना के हटाए जाने को अवैध ठहराया है। यह मामला सीतामढ़ी जिले के एक ग्राम पंचायत से संबंधित है, जहां याचिकाकर्ता कई वर्षों से अधिकृत उचित मूल्य दुकान (FPS) डीलर थे।

स्थानीय विधायक की सिफारिश और अनुमंडल पदाधिकारी (SDO) के निर्देश पर उनका नाम डीलर सूची से हटा दिया गया और किसी अन्य व्यक्ति को डीलर बना दिया गया। यह सब बिना किसी आरोप, जांच या याचिकाकर्ता को सुनवाई का अवसर दिए किया गया।

बिहार लक्षित सार्वजनिक वितरण प्रणाली (नियंत्रण) आदेश, 2016 के अनुसार, किसी डीलर को हटाने से पहले नोटिस देना और जवाब मांगना जरूरी है (क्लॉज 28)। लेकिन इस मामले में सरकारी अधिकारियों ने इन नियमों की अनदेखी की।

राज्य सरकार का तर्क था कि डीलरशिप को रद्द नहीं किया गया, केवल अस्थाई रूप से बदला गया है ताकि “प्रशासनिक सुविधा” बनी रहे। लेकिन कोर्ट ने माना कि ऐसा कोई अस्थाई प्रावधान कानून में नहीं है, और जब तक कोई आरोप या जांच न हो, किसी डीलर को हटाना पूरी तरह गैर-कानूनी है।

माननीय न्यायमूर्ति चक्रधारी शरण सिंह ने स्पष्ट किया कि डीलर का हक तब तक सुरक्षित है जब तक कि उसे कानूनन अयोग्य घोषित न किया जाए। सिर्फ राजनीतिक दबाव या स्थानीय सुविधा के नाम पर हटाया जाना संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) और अनुच्छेद 21 (जीवन और आजीविका का अधिकार) का उल्लंघन है।

कोर्ट ने नए डीलर की नियुक्ति को रद्द करते हुए याचिकाकर्ता की डीलरशिप बहाल करने का आदेश दिया।

निर्णय का महत्व और इसका प्रभाव आम जनता या सरकार पर

यह फैसला पीडीएस डीलरों के अधिकारों की रक्षा करता है और बिहार सरकार के अधिकारियों को यह चेतावनी देता है कि:

  • किसी भी डीलर को हटाने से पहले उचित कानूनी प्रक्रिया अपनाना अनिवार्य है।
  • प्रशासनिक सुविधा या राजनैतिक दबाव के आधार पर डीलरशिप हटाना कानूनन मान्य नहीं है।
  • जीवन यापन का अधिकार एक संवैधानिक अधिकार है और इसे प्रशासनिक आदेशों से छीना नहीं जा सकता।
  • यह फैसला पूरे राज्य में सार्वजनिक वितरण प्रणाली को अधिक पारदर्शी और कानूनी बनाएगा।

जो भी उचित मूल्य दुकान संचालक हैं, उन्हें यह फैसला कानूनी सुरक्षा देता है और यह समझाता है कि वे केवल कानूनी प्रक्रिया द्वारा ही हटाए जा सकते हैं, मनमाने तरीके से नहीं।

कानूनी मुद्दे और निर्णय (बुलेट में)

  • क्या बिना सूचना या सुनवाई के डीलर को हटाया जा सकता है?
    • नहीं। क्लॉज 28 के अनुसार, नोटिस और सुनवाई आवश्यक है।
  • क्या अस्थायी रूप से डीलर को हटाना प्रशासनिक अधिकार के अंतर्गत आता है?
    • नहीं। ऐसा कोई प्रावधान कानून में नहीं है।
  • क्या राजनीतिक सिफारिश या सुविधा के नाम पर डीलर को हटाया जा सकता है?
    • नहीं। यह अनुच्छेद 14 और 21 का उल्लंघन है।
  • क्या याचिकाकर्ता का आजीविका अधिकार प्रभावित हुआ?
    • हां। कोर्ट ने माना कि डीलरशिप का मनमाना हटाया जाना उनके संवैधानिक अधिकार का उल्लंघन है।

पार्टियों द्वारा संदर्भित निर्णय

  • कोई विशेष निर्णय प्रस्तुत नहीं किया गया

न्यायालय द्वारा उपयोग में लाए गए निर्णय

  • Prem Shankar Prasad v. State of Bihar, 2017 SCC OnLine Pat 1543
  • Amarnath Pandey v. State of Bihar, 2019 SCC OnLine Pat 1996
  • Anil Kumar v. State of Bihar, 2019 SCC OnLine Pat 1736
  • Raj Kishore Prasad v. State of Bihar, 2019 SCC OnLine Pat 2003
  • Deepak Kumar v. State of Bihar, 2019 SCC OnLine Pat 2320

मामले का शीर्षक

Nageshwar Paswan v. The State of Bihar & Ors.

केस नंबर

CWJC No. 8889 of 2020

उद्धरण (Citation)

2021(1)PLJR 45

न्यायमूर्ति गण का नाम

माननीय न्यायमूर्ति चक्रधारी शरण सिंह

वकीलों के नाम और किनकी ओर से पेश हुए

  • याचिकाकर्ता की ओर से: श्री एस. कुमार, श्री दीपक कुमार
  • राज्य की ओर से: श्री शिव शंकर प्रसाद (SC8), श्री अनिल कुमार (AC to SC8)

निर्णय का लिंक

https://patnahighcourt.gov.in/viewjudgment/MTUjNjY3MCMyMDIwIzEjTg==-Z–am1–ia6ainoN0=

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2 Responses

  1. सर नमस्कार, मैं रीता देवी मोदनगंज अनुज्ञप्ति स०-08/018, पिoडीoएस डिलर, जहानाबाद,,l मोदनगंज जहानाबाद के प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी द्वारा 40% कमीशन कि मांग कि जाती थी 04,kg/04,5,kg राशन कार्ड धारकों को देने का दबाव डाला जाता था,मैं रीता देवी ज०बि०प्र० विक्रेता मोदनगंज सही वज़न सही समय पर अनाज का वितरण करती थी, mo, साहब ने षड्यंत्र रच कर मोदनगंज जहानाबाद के कुछ महिलाओं और वार्ड संख्या को प्रलोभन/डरा धमकाकर मेरे प्रति ग़लत व्यान देने के लिए कहा गया और ग़लत ध्यान विडीयो ग्राफी कर ग़लत रिपोर्ट sdo Jehanabad को लेकर व-गैर शौ-कौज सुचना दिये ही मेरा लाइसेंस 08/018, को रद्द कर दिया गया अक्टूबर 2025,को, ,l पटना हाईकोर्ट के आदेश का पालन नहीं करते हुए जहानाबाद जिले में mo का मनमानी चल रहा है,( रीता देवी मोदनगंज जहानाबाद,9123196619,

    1. जहानाबाद के सभी pds गोदाम की जांच कराई जाए, खुलेआम वजन कम तौल, बोरा का बजन नहीं दिया जाता है, बोरा का बजन का अनाज का कमीशन mo, उच्च अधिकारी को जाता है यही बात गोदाम मैनेजर/ठेकेदार के कर्मचारी कह कर सभी डिलर से 100kg/200kg, अनाज काट लिया जाता है, उसके बाद mo को 40% कमीशन , वितरण पंजी में हस्ताक्षर करने पर 3000/ देना पड़ता है सभी डिलर को , जो डिलर नहीं देता है उस,डिलर के प्रति mo दृरा षड्यंत्र रच कर व-गैर शौ-कौज, सुचना दिये ही लाईसेंस रद्द कर दिया जाता है

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