पटना हाई कोर्ट का फैसला: 12 साल की सेवा के बाद ही शिक्षक वरिष्ठ वेतनमान के हकदार

निर्णय की सरल व्याख्या

पटना हाई कोर्ट ने 8 जुलाई 2020 को एक महत्वपूर्ण निर्णय में बिहार के औरंगाबाद ज़िले के 100 से अधिक शिक्षकों की याचिका पर फैसला सुनाया। ये शिक्षक पहले बिना प्रशिक्षण के बहाल किए गए थे और बाद में उन्होंने शिक्षक प्रशिक्षण पूरा किया। मामला इस बात को लेकर था कि क्या प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद उन्हें वरिष्ठ वेतनमान (senior scale) दिया जा सकता है, और क्या सरकार उनसे पहले से दिया गया वेतन वापस ले सकती है।

शिक्षकों की बहाली वर्ष 1995 के बाद हुई थी। अधिकतर के पास इंटरमीडिएट या स्नातक की डिग्री थी लेकिन बहाली के समय वे प्रशिक्षित नहीं थे। बाद में सभी ने प्रशिक्षण पूरा किया। 17 मई 2019 को जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (स्थापना), औरंगाबाद ने एक आदेश जारी कर इन शिक्षकों को वरिष्ठ वेतनमान प्रदान कर दिया।

लेकिन बाद में 5 मई 2020 को जिला शिक्षा पदाधिकारी द्वारा यह वेतनमान वापस ले लिया गया और वेतन की वसूली भी शुरू कर दी गई। सरकार का कहना था कि यह लाभ वित्त विभाग के 18 दिसंबर 1989 के प्रस्ताव के तहत गलत तरीके से दिया गया था, जो इन शिक्षकों पर लागू नहीं होता।

शिक्षकों ने इस निर्णय के खिलाफ कोर्ट में याचिका दायर की और दलील दी कि उन्होंने कोई धोखा या गलत सूचना नहीं दी थी, और उनसे बिना सुनवाई के पैसे वसूलना गलत है। कोर्ट ने दोनों पक्षों की बात सुनी।

सुनवाई के दौरान सरकार ने स्वीकार किया कि शिक्षक अगर प्रशिक्षण पूरा करने के बाद 12 साल की सेवा कर चुके हैं तो वे उच्च वेतनमान के पात्र हैं। याचिकाकर्ता भी इस पर सहमत हो गए और उन्होंने मूल याचिका से वे आदेश रद्द कराने की मांग वापस ले ली।

अब विवाद सिर्फ इस बात पर रह गया कि सरकार जो पैसा पहले ही वसूल चुकी है, क्या उसे वापस किया जाए या नहीं।

कोर्ट ने देखा कि –

  • यह लाभ शिक्षकों को बिना किसी धोखाधड़ी के दिया गया था।
  • लेकिन साथ ही, उस आदेश में साफ लिखा था कि अगर बाद में लाभ गलत पाया गया तो राशि वसूल की जा सकती है।
  • शिक्षक इस शर्त को मानते हुए पैसा ले चुके थे।
  • वसूली एक साल से भी कम समय में की गई थी।
  • शिक्षक न तो सेवानिवृत्त हैं और न ही रिटायरमेंट के करीब हैं।

इन तथ्यों को देखते हुए कोर्ट ने कहा कि पैसा वसूलने में कोई गैरकानूनी बात नहीं है और वसूली की गई रकम वापस नहीं की जाएगी। हाँ, कोर्ट ने यह निर्देश दिया कि सरकार तीन महीने के अंदर शिक्षकों की प्रशिक्षण प्राप्ति की तारीख से 12 साल की सेवा गिनकर जो भी वेतन और एरियर बनता है, वह पूरा भुगतान करे। अगर कोई अतिरिक्त राशि वसूलनी हो तो वह मासिक किस्तों में की जाए।

निर्णय का महत्व और इसका प्रभाव आम जनता या सरकार पर

यह फैसला पूरे बिहार में उन शिक्षकों के लिए मार्गदर्शक है जो बिना प्रशिक्षण के बहाल हुए और बाद में प्रशिक्षण प्राप्त किया। यह स्पष्ट करता है कि वरिष्ठ वेतनमान पाने के लिए 12 साल की सेवा प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद पूरी करनी होगी। सरकार के लिए यह आदेश एक कानूनी ढांचा प्रदान करता है जिससे वो ऐसे मामलों में गलत भुगतान को समय पर सुधार सकती है।

आम कर्मचारियों को भी यह समझने में मदद मिलती है कि किसी लाभ को लेने से पहले उसकी शर्तों को समझना जरूरी है, और सरकार द्वारा गलती से दी गई राशि पर वसूली संभव हो सकती है।

कानूनी मुद्दे और निर्णय (बुलेट में)

  • क्या बिना प्रशिक्षण के बहाल शिक्षक वरिष्ठ वेतनमान के पात्र हैं?
    ❖ नहीं। केवल प्रशिक्षण प्राप्त करने के 12 साल बाद ही पात्रता बनती है।
  • क्या बिना धोखाधड़ी के दी गई राशि की वसूली कानूनी है?
    ❖ हाँ, अगर आदेश में वसूली का प्रावधान हो और वसूली जल्दी कर ली गई हो।
  • क्या बिना सुनवाई के वसूली करना प्राकृतिक न्याय का उल्लंघन है?
    ❖ नहीं। जब परिणाम पहले से तय हो, तो सुनवाई केवल औपचारिकता रह जाती है।
  • क्या वसूली गई राशि वापस की जानी चाहिए?
    ❖ नहीं। शिक्षक स्वयं शर्तों को मानते हुए राशि ले चुके थे।

पार्टियों द्वारा संदर्भित निर्णय

  • Syed Abdul Qadir & Ors. v. State of Bihar, (2009) 3 SCC 475
  • Nand Kishore Sharma v. State of Bihar, 1995 Supp (3) SCC 722
  • State of Punjab v. Rafiq Masih (White Washer), (2015) 4 SCC 334

न्यायालय द्वारा उपयोग में लाए गए निर्णय

  • High Court of Punjab and Haryana v. Jagdev Singh, (2016) 14 SCC 267
  • Punjab National Bank v. Manjeet Singh, (2006) 8 SCC 647
  • Ashok Kumar Sonkar v. Union of India, (2007) 4 SCC 54

मामले का शीर्षक
Ranjan Kumar & Others v. The State of Bihar & Others

केस नंबर
Civil Writ Jurisdiction Case No. 5719 of 2020

उद्धरण (Citation)
2021(1) PLJR 1

न्यायमूर्ति गण का नाम
माननीय श्री न्यायमूर्ति मधुरेश प्रसाद

वकीलों के नाम और किनकी ओर से पेश हुए
श्री वाई.वी. गिरी (वरिष्ठ अधिवक्ता) और श्री प्रणव कुमार — याचिकाकर्ता की ओर से
श्री अशुतोष रंजन पांडे (AAG XV) — राज्य की ओर से

निर्णय का लिंक
https://patnahighcourt.gov.in/viewjudgment/MTUjNTcxOSMyMDIwIzEjTg==-g–am1–4ghQc8dvg=

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