निर्णय की सरल व्याख्या
पटना हाईकोर्ट ने बिहार सरकार को निर्देश दिया है कि वह एक सेवानिवृत्त वर्क-चार्ज कर्मचारी की पेंशन संबंधी मांग पर विचार करे और पहले दिए गए फैसलों के अनुसार लाभ प्रदान करे, यदि पात्रता पाई जाए।
याचिकाकर्ता को 1978 में जल संसाधन विभाग में वर्क-चार्ज कर्मचारी के रूप में नियुक्त किया गया था। उनकी सेवा 2009 में नियमित की गई और 2013 में वे सेवानिवृत्त हो गए। उन्होंने कुल 35 वर्ष से अधिक की निरंतर सेवा दी। इसके बावजूद, राज्य सरकार ने उन्हें पेंशन देने से इंकार कर दिया, यह कहते हुए कि उनकी नियमितीकरण तिथि 1 सितंबर 2005 के बाद की है, जो पुरानी पेंशन योजना की पात्रता की कट-ऑफ तिथि है।
याचिकाकर्ता का तर्क था कि उनकी पूरी सेवा 1978 से गिनी जानी चाहिए और उन्होंने पटना हाईकोर्ट के राम शंकर दास बनाम बिहार राज्य और मोस्ट. फुलेना खातून बनाम बिहार राज्य मामलों पर भरोसा किया, जिनमें कोर्ट ने कहा था कि लंबे समय से कार्यरत वर्क-चार्ज कर्मचारियों को, जिनकी नियमितीकरण तिथि कट-ऑफ के बाद की है, पेंशन से वंचित नहीं किया जा सकता यदि उनकी नियुक्ति कट-ऑफ से पहले हुई थी।
राज्य सरकार का कहना था कि बिहार पेंशन नियम और वित्त विभाग के 23 सितंबर 2009 के प्रस्ताव के अनुसार केवल वही कर्मचारी पुरानी पेंशन योजना में पात्र हैं जिनकी सेवा नियमितीकरण तिथि 1 सितंबर 2005 से पहले की है, बाकी सभी के लिए अंशदायी पेंशन योजना (CPS) लागू है।
हाईकोर्ट ने कहा कि यह मुद्दा अब नया नहीं है, क्योंकि पहले भी कई मामलों में यह तय किया जा चुका है कि यदि कोई कर्मचारी कट-ऑफ से पहले लगातार सेवा में था, तो बाद में नियमितीकरण होने पर भी उसे पेंशन का अधिकार होगा। यह सिद्धांत न्याय और निष्पक्षता पर आधारित है, क्योंकि ऐसे कर्मचारी राज्य को दशकों तक सेवा दे चुके हैं।
इसी आधार पर, कोर्ट ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता का मामला पहले के फैसलों के अनुरूप जांचें और पात्र पाए जाने पर पेंशन का लाभ दें। यह प्रक्रिया चार महीने में पूरी की जाए।
निर्णय का महत्व और प्रभाव
- लंबे समय से सेवा कर रहे वर्क-चार्ज कर्मचारियों को केवल नियमितीकरण की देर से हुई तारीख के कारण पेंशन से वंचित नहीं किया जा सकता।
- कोर्ट समान परिस्थितियों वाले कर्मचारियों के लिए एक समान नीति अपनाने पर जोर देता है।
- पेंशन को सामाजिक सुरक्षा का साधन माना जाता है, और इसे दशकों की सेवा देने वालों के पक्ष में उदार दृष्टिकोण से देखा जाना चाहिए।
कर्मचारियों के लिए यह फैसला आशा देता है कि कट-ऑफ तिथि से पहले नियुक्ति होने के बावजूद देर से नियमित होने पर भी पेंशन मिल सकती है। सरकार के लिए यह संदेश है कि न्यायालय के निर्देशों के अनुसार एकसमान नीति अपनाई जाए ताकि बार-बार मुकदमेबाजी न हो।
कानूनी मुद्दे और निर्णय
- क्या 1 सितंबर 2005 से पहले नियुक्त लेकिन बाद में नियमित हुए वर्क-चार्ज कर्मचारी को पुरानी पेंशन योजना का लाभ मिलेगा?
निर्णय: हां। पहले के फैसलों के आधार पर लंबी सेवा को पेंशन पात्रता में गिना जाना चाहिए।
पार्टियों द्वारा संदर्भित निर्णय
- राम शंकर दास बनाम बिहार राज्य, 2021 (2) PLJR 769
- मोस्ट. फुलेना खातून बनाम बिहार राज्य, 2019 (3) PLJR 833
न्यायालय द्वारा उद्धृत निर्णय
- राम शंकर दास बनाम बिहार राज्य, 2021 (2) PLJR 769
- मोस्ट. फुलेना खातून बनाम बिहार राज्य, 2019 (3) PLJR 833
मामले का शीर्षक
Ramji Prasad Singh बनाम State of Bihar & Ors.
केस नंबर
Civil Writ Jurisdiction Case No. 657 of 2024
उद्धरण (Citation)
2020 (3) PLJR 188
न्यायमूर्ति गण का नाम
माननीय श्री न्यायमूर्ति पी. बी. बजंथरी
माननीय श्री न्यायमूर्ति अरुण कुमार झा
वकीलों के नाम और किनकी ओर से पेश हुए
याचिकाकर्ता की ओर से: श्री सत्यवीर भारती, अधिवक्ता
प्रतिवादी की ओर से: श्री एस. के. रवि, G.A.-12
निर्णय का लिंक
https://patnahighcourt.gov.in/viewjudgment/MSM5NiMxOTkxIzEjTg==-O5sWztUxKEg=
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