निर्णय की सरल व्याख्या
पटना हाईकोर्ट ने हाल ही में एक प्राइवेट फर्म की याचिका खारिज कर दी, जिसमें उसने नॉर्थ बिहार पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड (NBPDCL) द्वारा तीन साल के लिए ब्लैकलिस्ट किए जाने को चुनौती दी थी। यह मामला डीपीसी एल्यूमिनियम वाइंडिंग वायर की सप्लाई के लिए जारी एक टेंडर से जुड़ा है, जिसमें याचिकाकर्ता ने अपनी कीमत किलो (Kg) में बताई थी, जबकि टेंडर दस्तावेज़ में साफ लिखा था कि कीमत मीट्रिक टन (MT) के आधार पर दी जानी चाहिए।
टेंडर (NIT No. 14/PR/NBPDCL/2021) के अनुसार सभी बोलीदाता को कीमत प्रति मीट्रिक टन में देनी थी। लेकिन याचिकाकर्ता ने गलती से प्रति किलो में कीमत भर दी। गलती पता चलने पर, 23 जुलाई 2021 को कंपनी को पत्र भेजकर उसने कहा कि कीमत को किलो के आधार पर माना जाए। बाद में उसने सुझाव दिया कि उसकी बताई कीमत को मीट्रिक टन में बदल दिया जाए (₹300.31 × 1000 = ₹3,00,310 प्रति MT)।
NBPDCL ने इसे बोली जमा होने के बाद बोली में संशोधन माना, जो NIT की धारा 1.10(d) का उल्लंघन है। इस धारा में साफ लिखा है कि बोली की वैधता अवधि के दौरान बोली को वापस लेना या बदलना 3 से 5 साल की निलंबन/ब्लैकलिस्टिंग का कारण बनेगा। नतीजतन, कंपनी ने याचिकाकर्ता को तीन साल के लिए अपने भविष्य के टेंडरों में भाग लेने से रोक दिया।
पहले भी याचिकाकर्ता ने इस ब्लैकलिस्टिंग को CWJC No. 14888 of 2021 में चुनौती दी थी। उस समय हाईकोर्ट ने पहली ब्लैकलिस्टिंग रद्द कर NBPDCL को निर्देश दिया था कि मामले पर फिर से विचार कर याचिकाकर्ता को सुनवाई का मौका दें। सुनवाई के बाद NBPDCL ने 11 अक्टूबर 2022 को नोटिस भेजा, 19 अक्टूबर को जवाब प्राप्त किया और 26 दिसंबर 2022 को फिर से तीन साल की ब्लैकलिस्टिंग लगा दी।
याचिकाकर्ता का कहना था कि यह महज टाइपिंग की गलती थी, इसमें कोई धोखाधड़ी का इरादा नहीं था, और अगर कीमत को मीट्रिक टन में बदला भी जाए तो भी वह सबसे कम बोलीदाता नहीं बनता। उसने यह भी कहा कि कंपनी को केवल उसकी बोली खारिज करनी चाहिए थी, ब्लैकलिस्ट नहीं करना चाहिए था। उसने अपने पक्ष में पटना हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसले पेश किए।
NBPDCL का कहना था कि यह कोई छोटी तकनीकी गलती नहीं, बल्कि टेंडर के नियमों से गंभीर विचलन है। प्रति किलो के बजाय प्रति मीट्रिक टन कीमत देना मूल्यांकन प्रक्रिया को बदल देता है। टेंडर में कहीं भी इस तरह की बाद की कन्वर्ज़न की अनुमति नहीं है।
हाईकोर्ट ने कहा:
- किलो में कीमत देना मीट्रिक टन की बजाय एक महत्वपूर्ण बदलाव है, न कि टाइपिंग की गलती।
- बाद में कीमत को मीट्रिक टन में बदलने का अनुरोध बोली में संशोधन है, जो धारा 1.10(d) के तहत दंडनीय है।
- इस धारा में न्यूनतम तीन साल का निलंबन तय है, जिसे कोर्ट कम नहीं कर सकता।
- याचिकाकर्ता के द्वारा पेश किए गए फैसले इस मामले से अलग तथ्य रखते हैं और मददगार नहीं हैं।
अंततः, कोर्ट ने याचिका खारिज कर NBPDCL की तीन साल की ब्लैकलिस्टिंग बरकरार रखी।
निर्णय का महत्व और इसका प्रभाव आम जनता या सरकार पर
यह फैसला ठेकेदारी और सरकारी खरीद-प्रक्रिया में नियमों के पालन के महत्व को दोहराता है।
ठेकेदारों और सप्लायरों के लिए सीख:
- टेंडर जमा करने के बाद किसी भी तरह का बदलाव, भले ही वह स्पष्टिकरण के नाम पर हो, संशोधन माना जा सकता है और भारी दंड हो सकता है।
- यूनिट, मात्रा और मूल्य प्रारूप जैसी शर्तों का सख्ती से पालन करें।
- यदि टेंडर शर्त में न्यूनतम दंड अवधि तय है, तो अदालतें उसे कम करने में संकोच करती हैं।
सरकारी विभागों के लिए यह निर्णय पारदर्शिता और नियमबद्ध खरीद प्रक्रिया को बनाए रखने के महत्व को मजबूत करता है, साथ ही यह भी बताता है कि बिना ठोस प्रमाण के किसी बोलीदाता की नीयत पर सवाल उठाना उचित नहीं है।
कानूनी मुद्दे और निर्णय
- मुद्दा 1: क्या किलो में कीमत देना टाइपिंग की छोटी गलती है?
निर्णय: नहीं, यह गंभीर विचलन है। - मुद्दा 2: क्या कीमत को बाद में मीट्रिक टन में बदलना बोली में संशोधन है?
निर्णय: हां, यह धारा 1.10(d) का उल्लंघन है। - मुद्दा 3: क्या ब्लैकलिस्टिंग अवधि कम की जा सकती है?
निर्णय: नहीं, न्यूनतम अवधि तीन साल तय है। - मुद्दा 4: क्या पुराने फैसले लागू होते हैं?
निर्णय: नहीं, तथ्य अलग थे और ऐसी दंडात्मक धारा वहां नहीं थी।
पार्टियों द्वारा संदर्भित निर्णय
- CWJC No. 2991 of 2019, Aarpee Infra Projects Pvt. Ltd. vs. State of Bihar & Ors. (पटना हाईकोर्ट)
- Supreme Infrastructure India Ltd. vs. Rail Vikas Nigam Ltd. & Ors. (सुप्रीम कोर्ट)
मामले का शीर्षक
M/s Balaji Enterprises बनाम North Bihar Power Distribution Company Ltd. & Ors.
केस नंबर
Civil Writ Jurisdiction Case No. 810 of 2023
न्यायमूर्ति गण का नाम
माननीय श्री न्यायमूर्ति पी. बी. बजंथरी
माननीय श्री न्यायमूर्ति अरुण कुमार झा
वकीलों के नाम और किनकी ओर से पेश हुए
याचिकाकर्ता की ओर से: श्री एस. डी. संजय (वरिष्ठ अधिवक्ता), श्रीमती पारुल प्रसाद (अधिवक्ता), सुश्री सुष्मिता मिश्रा (अधिवक्ता)
प्रतिवादी की ओर से: श्री विनय कीर्ति सिंह (वरिष्ठ अधिवक्ता), श्री विजय कुमार वर्मा (अधिवक्ता), श्री अखिलेश्वर सिंह (अधिवक्ता)
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