पटना उच्च न्यायालय ने एक निजी निर्माण कंपनी द्वारा दायर उस याचिका को खारिज कर दिया जिसमें दो सरकारी टेंडरों में उसकी तकनीकी बोली अस्वीकार किए जाने को चुनौती दी गई थी। कोर्ट ने कहा कि चूंकि इस मामले में कोई अंतरिम राहत नहीं दी गई थी और टेंडर प्रक्रिया संभवतः पूरी हो चुकी है, इसलिए अब यह याचिका निष्प्रभावी (infructuous) हो गई है।
निर्णय की सरल व्याख्या
इस मामले में याचिकाकर्ता एक प्राइवेट कंस्ट्रक्शन कंपनी थी जिसने बिहार सरकार के ग्रामीण कार्य विभाग द्वारा जारी दो टेंडरों में भाग लिया था। 2 अगस्त 2016 को याचिकाकर्ता को मोबाइल पर दो एसएमएस मिले जिसमें यह बताया गया कि उसके दोनों टेंडरों की तकनीकी बोली अस्वीकार कर दी गई है। कारण के रूप में केवल “AS PER NIT” लिखा था, यानी नोटिस इनवाइटिंग टेंडर के अनुसार।
इस पर याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर निम्नलिखित मांगे रखीं:
- एक आदेश जारी हो जिससे सरकार को बोली अस्वीकृति का कारण लिखित रूप में प्रस्तुत करने को कहा जाए।
- यदि अस्वीकृति का एकमात्र कारण पहले से टेंडर में निष्कासन (debarment) हो, तो उसकी तकनीकी बोली स्वीकार की जाए।
- अदालत जो उपयुक्त समझे वह अन्य आदेश या निर्देश दे।
हालांकि, यह याचिका 2016 में दायर की गई थी लेकिन कोर्ट ने इसका निर्णय 2023 में दिया। निर्णय वाले दिन याचिकाकर्ता का कोई अधिवक्ता अदालत में उपस्थित नहीं था। साथ ही, इतने वर्षों में इस याचिका पर कोई अंतरिम राहत भी नहीं दी गई थी।
इस कारण कोर्ट ने माना कि संबंधित टेंडर की प्रक्रिया या तो पूरी हो चुकी है या फिर नया टेंडर जारी किया जा चुका है। ऐसे में मूल मुद्दा अब अस्तित्व में नहीं है और याचिका निष्प्रभावी हो गई है। अतः याचिका खारिज कर दी गई।
निर्णय का महत्व और इसका प्रभाव आम जनता या सरकार पर
यह निर्णय एक महत्वपूर्ण सीख देता है कि यदि कोई व्यक्ति या कंपनी सरकारी टेंडर में भाग लेती है और उसे लगता है कि उसके साथ अन्याय हुआ है, तो उसे शीघ्र और सक्रिय रूप से कानूनी उपाय लेना चाहिए। यदि समय रहते अदालत से अंतरिम राहत नहीं ली गई और प्रक्रिया आगे बढ़ गई, तो फिर कानूनी उपाय का कोई अर्थ नहीं रह जाता।
यह निर्णय सरकारी विभागों के लिए भी संकेत देता है कि टेंडर अस्वीकृति की जानकारी केवल एसएमएस से देना पर्याप्त नहीं है। भले ही इस मामले में याचिकाकर्ता ने मामला आगे नहीं बढ़ाया, परंतु ऐसे संक्षिप्त उत्तर पारदर्शिता के मानकों पर खरे नहीं उतरते।
कानूनी मुद्दे और निर्णय (बुलेट में)
- मुद्दा: क्या केवल एसएमएस के माध्यम से तकनीकी बोली की अस्वीकृति देना वैध है?
- कोर्ट का निर्णय: कोर्ट ने इस पर कोई अंतिम राय नहीं दी क्योंकि याचिका निष्प्रभावी हो चुकी थी।
- मुद्दा: क्या बिना अंतरिम राहत के याचिकाकर्ता को अब कोई लाभ मिल सकता है?
- कोर्ट का निर्णय: याचिका निष्प्रभावी होने के कारण खारिज कर दी गई।
- तर्क:
- याचिकाकर्ता सुनवाई के दिन उपस्थित नहीं था।
- याचिका दायर होने के वर्षों बाद तक कोई रोक नहीं ली गई।
- संभवतः टेंडर की प्रक्रिया समाप्त हो चुकी थी, जिससे याचिका का उद्देश्य ही समाप्त हो गया।
मामले का शीर्षक
Arpit Engicon Pvt. Ltd. बनाम बिहार राज्य एवं अन्य
केस नंबर
Civil Writ Jurisdiction Case No. 14003 of 2016
न्यायमूर्ति गण का नाम
माननीय श्री न्यायमूर्ति पी. बी. बजंथरी
माननीय श्री न्यायमूर्ति अरुण कुमार झा
वकीलों के नाम और किनकी ओर से पेश हुए
प्रतिवादियों की ओर से: श्री अजय, सरकारी अधिवक्ता (GA 5)
(याचिकाकर्ता की ओर से कोई उपस्थित नहीं था)
निर्णय का लिंक
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