SARFAESI कानून के तहत अपील से पहले जमा राशि घटाने की मांग को पटना हाई कोर्ट ने खारिज किया

निर्णय की सरल व्याख्या

पटना हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में यह स्पष्ट किया कि SARFAESI कानून, 2002 की धारा 18 के तहत जब कोई व्यक्ति बैंक के खिलाफ अपील करता है, तो उसे बैंक द्वारा मांगी गई पूरी बकाया राशि (सूद समेत) का कम से कम 50% जमा करना अनिवार्य है।

इस मामले में याचिकाकर्ता एक बकायेदार परिवार था, जिनकी संपत्ति पंजाब नेशनल बैंक (PNB) ने बकाया वसूली के लिए जब्त की थी। बैंक ने वर्ष 2009 में ₹1.33 करोड़ की बकाया राशि का नोटिस दिया था। वर्ष 2017 में बैंक ने उस संपत्ति को ₹1.33 करोड़ में बेच दिया और उसकी राशि बकाए में समायोजित कर ली। इसके बाद भी बैंक ने ब्याज जोड़कर कुल बकाया ₹2.95 करोड़ बताया और कहा कि अपील करने से पहले 50% यानी लगभग ₹1.47 करोड़ जमा करना होगा।

याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि जब ₹1.33 करोड़ ही मांगा गया था, और बैंक ने संपत्ति भी कब्जे में रखी थी, तो ब्याज नहीं जोड़ा जाना चाहिए। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के फैसले Narayan Chandra Ghosh v. UCO Bank (2011) का हवाला दिया, जिसमें ₹15 लाख जमा कर अपील सुनने का आदेश दिया गया था।

बैंक की ओर से तर्क दिया गया कि कानून में “debt” यानी ‘ऋण’ की परिभाषा में ब्याज भी शामिल होता है और इसलिए कुल बकाया में ब्याज जोड़ना बिल्कुल वैध है। बैंक ने Nathi Lal Rathore v. DRAT (2017) के निर्णय का हवाला दिया, जिसमें कहा गया कि धारा 18 के तहत अपील से पहले जमा की जाने वाली राशि में ब्याज भी शामिल होता है।

पटना हाई कोर्ट ने सभी तर्कों को सुनने के बाद यह माना कि अपीलीय प्राधिकरण द्वारा जमा राशि कम करने से इंकार करना सही है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा दी गई राहत सिर्फ संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत दी गई थी, जिसकी शक्तियाँ उच्च न्यायालयों को नहीं होती।

इसलिए कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी और कहा कि जब तक कुल बकाया (ब्याज समेत) का 50% जमा नहीं किया जाएगा, तब तक अपील नहीं सुनी जा सकती।

निर्णय का महत्व और इसका प्रभाव आम जनता या सरकार पर

यह फैसला आम जनता और बैंक ग्राहकों के लिए एक महत्वपूर्ण संकेत है कि बैंक द्वारा वसूली की कार्यवाही के खिलाफ अपील करने से पहले निर्धारित राशि जमा करना अनिवार्य है। यह प्रावधान उधारकर्ताओं को अनुशासन में रखने और बैंकों को समय पर वसूली करने की सुविधा देता है।

बैंकों के लिए यह निर्णय इस बात की पुष्टि करता है कि वे बकाया राशि में ब्याज को शामिल कर सकते हैं और उसे अपील के लिए जमा की शर्त के रूप में इस्तेमाल कर सकते हैं। आम जनता के लिए यह एक चेतावनी है कि संपत्ति जब्त होने के बाद ब्याज भी जुड़ सकता है, और कानूनी राहत तभी मिलेगी जब आवश्यक राशि जमा की जाए।

कानूनी मुद्दे और निर्णय (बुलेट में)

  • क्या धारा 18 के तहत जमा राशि में ब्याज शामिल होगा?
    ✔ हां, ब्याज समेत पूरी बकाया राशि पर आधारित 50% जमा करना होगा।
  • क्या हाई कोर्ट जमा राशि में छूट दे सकता है?
    ❌ नहीं, हाई कोर्ट के पास ऐसी शक्ति नहीं है। यह केवल सुप्रीम कोर्ट अनुच्छेद 142 के तहत कर सकता है।
  • क्या अपीलीय प्राधिकरण द्वारा जमा राशि कम नहीं करने का निर्णय सही था?
    ✔ हां, कोर्ट ने कहा कि यह निर्णय कानून के अनुसार और वैध था।

पार्टियों द्वारा संदर्भित निर्णय

  • Narayan Chandra Ghosh v. UCO Bank & Ors., AIR 2011 SC 1913; (2011) 4 SCC 548

न्यायालय द्वारा उपयोग में लाए गए निर्णय

  • Nathi Lal Rathore v. Debts Recovery Appellate Tribunal and Ors., 2017 1 Bankmann (DRT) 326

मामले का शीर्षक

Ram Babu Choudhary & Ors. v. The Chairman, Debts Recovery Appellate Tribunal & Ors.

केस नंबर

Civil Writ Jurisdiction Case No. 4203 of 2018

उद्धरण (Citation)

2020 (1) PLJR 38

न्यायमूर्ति गण का नाम

माननीय श्री न्यायमूर्ति राजीव रंजन प्रसाद

वकीलों के नाम और किनकी ओर से पेश हुए

  • श्री डॉ. बिनय कुमार सिंह, याचिकाकर्ताओं की ओर से
  • श्री कुमार प्रिया रंजन (SC) और श्री पल्लव, पंजाब नेशनल बैंक की ओर से
  • श्री सतीश कुमार सिन्हा और श्री नित्यानंद, प्रतिवादी संख्या 4 की ओर से

निर्णय का लिंक

https://patnahighcourt.gov.in/vieworder/MTUjNDIwMyMyMDE4IzQjTg==-sTfqFCq–am1–W–am1–c=

“यदि आपको यह जानकारी उपयोगी लगी और आप बिहार में कानूनी बदलावों से जुड़े रहना चाहते हैं, तो Samvida Law Associates को फॉलो कर सकते हैं।”

Facing a similar matter before the Patna High Court? Contact Samvida Law Associates.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recent News