मोटर दुर्घटना मुआवजा मामला – राम सखी देवी बनाम अमर किशोर सिंह और अन्य का यह एक महत्वपूर्ण निर्णय है जो पटना उच्च न्यायालय ने 2019 में दिया। मामले में एक माँ द्वारा अपने पुत्र की दुर्घटना में मृत्यु के बाद मुआवजे की मांग की गई थी। पप्पू कुमार सिंह नामक युवक स्कूटर पर सवार थे जब एक ट्रक ने पीछे से उनकी स्कूटर को टक्कर मार दी, जिससे उनकी मृत्यु हो गई। दुर्घटना के समय उनकी उम्र लगभग 30 वर्ष थी।
निचली अदालत (ट्रिब्यूनल) ने इस मामले में 2,79,320 रुपये का मुआवजा मंजूर किया था। परिवार का दावा था कि मृतक एक स्टेशनरी की दुकान चलाता था और उसकी मासिक आय 3,000 रुपये थी। हालांकि, आय के समर्थन में पर्याप्त दस्तावेज नहीं होने के कारण, ट्रिब्यूनल ने एक अकुशल मजदूर की दैनिक मजदूरी के आधार पर 89 रुपये प्रतिदिन की दर से गणना की थी।
उच्च न्यायालय ने मामले की पुनर्समीक्षा करते हुए मृतक की मासिक आय 3,000 रुपये मानी और भविष्य की संभावनाओं के लिए 40% की वृद्धि जोड़ी। व्यक्तिगत खर्चों के लिए 50% की कटौती करने के बाद, न्यायालय ने शुद्ध मासिक आय 2,100 रुपये निर्धारित की। आयु के आधार पर गुणक 17 लागू करते हुए, आश्रितता का नुकसान 4,28,400 रुपये निर्धारित किया गया।
न्यायालय ने इस मामले में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए कंसोर्टियम (पारिवारिक संबंधों का नुकसान) के लिए 40,000 रुपये, संपदा के नुकसान के लिए 15,000 रुपये और अंतिम संस्कार खर्च के लिए 15,000 रुपये का अतिरिक्त मुआवजा मंजूर किया। कुल मिलाकर मुआवजे की राशि 4,98,400 रुपये निर्धारित की गई। साथ ही, आवेदन की तिथि से भुगतान की तिथि तक 8% वार्षिक ब्याज देय होने का भी आदेश दिया गया।
यह निर्णय मोटर दुर्घटना के पीड़ितों के अधिकारों की रक्षा का एक महत्वपूर्ण उदाहरण है। न्यायालय ने मैग्मा जनरल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड बनाम नानू राम के मामले का हवाला देते हुए कंसोर्टियम के तीन प्रकारों – वैवाहिक, अभिभावकीय और संतान कंसोर्टियम को मान्यता दी। यह फैसला न केवल आर्थिक नुकसान की भरपाई पर केंद्रित है, बल्कि परिवार के भावनात्मक नुकसान को भी मान्यता देता है।
यह मामला यह भी दर्शाता है कि कैसे न्यायिक प्रणाली दुर्घटना पीड़ितों के परिवारों के हितों की रक्षा करती है। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि मोटर वाहन अधिनियम एक कल्याणकारी कानून है, जिसका उद्देश्य पीड़ितों या उनके परिवारों को उचित राहत प्रदान करना है। यह निर्णय भविष्य के मामलों में मार्गदर्शक सिद्धांतों के रूप में काम करेगा और दुर्घटना पीड़ितों के परिवारों को न्याय दिलाने में सहायक होगा।
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https://patnahighcourt.gov.in/viewjudgment/MiMzNjQjMjAxNCMxI04=—ak1–WC9gzFPt9w=


