“वैध व्यापार और कस्टम अधिकार: पटना उच्च न्यायालय का महत्वपूर्ण फैसला”

 

यह मामला पत्रपेटेंट अपील संख्या 1153/2019 के तहत सुना गया, जिसमें नागरिक रिट अधिकारिता मामला संख्या 10109/2019
का निर्णय चुनौती दी गई थी। यह निर्णय माननीय मुख्य न्यायाधीश और न्यायमूर्ति अनिल कुमार उपाध्याय की खंडपीठ द्वारा दिया गया। इस मामले का मुख्य प्रश्न यह था कि कस्टम अधिनियम, 1962 की धारा 110 के तहतविश्वास का कारणऔरजब्ती योग्यशब्दों का अर्थ क्या है?”


पृष्ठभूमि

  1. मामले का परिचय: – याचिकाकर्ता एम/एस ओम साई ट्रेडिंग कंपनी और एम/एस मां कामाख्या ट्रेडर्स हैं। दोनों असम में स्थित हैं और जीएसटी अधिनियम के तहत पंजीकृत व्यापारी हैं। इनकी वस्तुओं को बिहार के राष्ट्रीय राजमार्ग पर जब्त किया गया।जब्त की गई वस्तुएंकटे हुए सूखे सुपारी‘ (Areca Nuts) थीं, जिनकी कुल मात्रा 15,865 किलोग्राम और अनुमानित मूल्य ₹45,14,862/- था।
  2. जब्ती का कारण: – कस्टम अधिकारियों ने दावा किया कि ये सुपारी विदेशी मूल (भारत के बाहर) की थी और इसे अवैध रूप से भारत में लाया गया था। इस आधार पर इसे जब्त किया गया।
  3. याचिकाकर्ता का तर्क: – याचिकाकर्ता का दावा था कि सुपारी भारतीय मूल की थी और असम से तमिलनाडु के लिए वैध रूप से ले जाई जा रही थी।दस्तावेजों के अनुसार, माल असम में उत्पन्न हुआ और तमिलनाडु के कोयंबटूर भेजा जा रहा था।
  4. अदालत में प्रस्तुत सवाल: – क्या कस्टम अधिकारी
    विश्वास का कारण” (Reason to Believe) के आधार पर जब्ती के लिए अधिकृत थे? – क्या सुपारी सचमुच विदेशी मूल की थी और इसे
    जब्ती योग्य” (Liable to Confiscation) कहा जा सकता था?


न्यायालय का विश्लेषण

1. “विश्वास का कारणका अर्थ:

अदालत ने स्पष्ट किया किविश्वास का कारणका अर्थ केवल अधिकारी की व्यक्तिगत राय नहीं है। यह धारणा निष्पक्ष, यथार्थ और विश्वसनीय आधारों पर आधारित होनी चाहिए।सुप्रीम कोर्ट के Mohinder Singh Gill बनाम मुख्य निर्वाचन आयुक्त (AIR 1978 SC 851) के निर्णय का हवाला देते हुए अदालत ने कहा कि: – किसी भी आदेश की वैधता उसके जारी किए गए कारणों के आधार पर तय की जाएगी।बाद में कारण जोड़ने या बदलने की अनुमति नहीं है।

2. “जब्ती योग्यवस्तुएं:

कस्टम अधिनियम की धारा 111 के तहत केवल वे वस्तुएं जब्ती योग्य हैं जो विदेश से अवैध रूप से भारत लाई गई हों।इस मामले में, कस्टम अधिकारियों ने यह साबित नहीं किया कि सुपारी नेपाल या किसी अन्य विदेशी स्थान से लाई गई थी।

3. कस्टम क्षेत्र के बाहर जब्ती:

याचिकाकर्ताओं की वस्तुएं बिहार के राजमार्ग पर टोल संग्रहण बिंदु पर जब्त की गईं, जो कस्टम अधिनियम के तहतकस्टम क्षेत्रनहीं है।दस्तावेजों से यह स्पष्ट था कि वस्तुएं असम से चली थीं और भारतीय क्षेत्र में ही थीं।

4. सुपारी की उत्पत्ति:

कस्टम अधिकारियों का यह दावा किगहरे गुलाबी रंग की सूखी सुपारीभारतीय मूल की नहीं हो सकती, केवल संदेह पर आधारित था।सुपारी की उत्पत्ति का वैज्ञानिक प्रमाण या पुष्टि प्रस्तुत नहीं की गई।

5. वैज्ञानिक जांच और रिपोर्ट:

सुपारी के नमूनों की जांच की गई, लेकिन प्रयोगशाला की रिपोर्ट ने इसे केवलसंदिग्धबताया।अदालत ने इसे पर्याप्त नहीं माना।

6. अधिकारियों की कार्यवाही:

कस्टम अधिकारियों ने कस्टम अधिनियम के तहत जारी निर्देशों का पालन नहीं किया। – “विश्वास का कारणस्थापित करने के लिए ठोस साक्ष्य की आवश्यकता होती है, जो यहां अनुपस्थित था।


अदालत का निर्णय

  1. जब्ती को अवैध घोषित किया गया:अदालत ने कहा कि कस्टम अधिकारियों द्वारा की गई जब्ती बिना किसी ठोस आधार के थी और इसे कानून का समर्थन नहीं था।
  2. याचिकाकर्ता के पक्ष में निर्णय:याचिकाकर्ताओं की वस्तुओं को तुरंत रिलीज़ करने का आदेश दिया गया।इस आदेश में शामिल वाहन को भी रिलीज़ करने का निर्देश दिया गया।
  3. अधिकारियों की सीमाओं की पुनर्पुष्टि:अदालत ने दोहराया कि कस्टम अधिकारी केवल कस्टम अधिनियम के तहत निर्धारित क्षेत्रों और शर्तों में ही कार्य कर सकते हैं।
  4. अन्य संबंधित फैसलों का पालन:अदालत ने पूर्व में इसी तरह के मामलों (जैसे, M/s
    Ayesha Exports
    बनाम यूनियन ऑफ इंडिया) के निर्णयों का हवाला दिया और कहा कि न्यायिक स्थिरता बनाए रखना आवश्यक है।


निर्णय का महत्व

  1. विश्वास का कारणकी व्याख्या:यह निर्णय कस्टम अधिनियम की धारा 110 के तहत
    विश्वास का कारणकी कानूनी परिभाषा को सटीकता से परिभाषित करता है।
  2. व्यापारियों के अधिकारों की सुरक्षा:यह निर्णय वैध व्यापार गतिविधियों में लगे व्यापारियों के अधिकारों की सुरक्षा करता है।
  3. कस्टम अधिकारियों के लिए दिशानिर्देश:अधिकारियों को यह याद दिलाया गया कि वे केवल कानूनी प्रावधानों के तहत ही कार्य कर सकते हैं और उन्हें
    संदेह
    के आधार पर कार्रवाई करने से बचना चाहिए।
  4. न्यायिक स्थिरता:अदालत ने न्यायिक स्थिरता और एकरूपता पर जोर दिया, यह सुनिश्चित करते हुए कि समान मामलों में भिन्न निर्णय दिए जाएं।


निष्कर्ष

यह निर्णय कस्टम अधिनियम, 1962 की धारा 110 की व्याख्या में मील का पत्थर है। न्यायालय नेविश्वास का कारणऔरजब्ती योग्यशब्दों को स्पष्ट किया और अधिकारियों की मनमानी पर रोक लगाई। यह निर्णय केवल याचिकाकर्ताओं के लिए राहत प्रदान करता है, बल्कि भविष्य में व्यापारिक समुदाय के लिए भी एक महत्वपूर्ण संदर्भ के रूप में कार्य करेगा।

पूरा
फैसला पढ़ने के लिए यहां
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