पटना उच्च न्यायालय में दायर यह मामला एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक न्याय से संबंधित है। मामले में कुमारी रीता, एक बाल विकास परियोजना अधिकारी (CDPO), पर 56 आंगनबाड़ी सेविकाओं द्वारा 3,000 रुपये प्रति केंद्र की अवैध मांग का आरोप लगाया गया था।
मुख्य तथ्य:
• जिला भोजपुर में रीता को अवैध मांग का दोषी पाया गया
• विभाग ने उन्हें वेतनमान में न्यूनतम स्तर तक घटा दिया
• 71 आंगनबाड़ी सेविकाओं ने बाद में आरोपों को झूठा बताया
न्यायालय ने कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर ध्यान दिया:
1. मूल शिकायत में रीता पर सीधा आरोप नहीं था
2. जांच अधिकारी ने बिना गवाहों के मामला निपटाया
3. अतिरिक्त कलेक्टर की रिपोर्ट में भी स्पष्ट निष्कर्ष नहीं था
न्यायालय ने विभागीय कार्रवाई को अवैध करार देते हुए:
• दंड आदेश को रद्द किया
• रीता को सभी पदीय लाभ बहाल किए
• विभाग पर 10,000 रुपये का जुर्माना लगाया
यह निर्णय प्रशासनिक जांच में निष्पक्षता और न्यायिक प्रक्रिया के महत्व को दर्शाता है।
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