“सेवा अवधि और परिवार पेंशन: एक महत्वपूर्ण न्यायिक निर्णय”

 


पटना उच्च न्यायालय में दायर की गई यह लोक याचिका अपील (Letters Patent Appeal) एक महत्वपूर्ण मामला है जो बिहार सरकार और एक कर्मचारी की विधवा के बीच परिवार पेंशन के अधिकार को लेकर है। मामले के मुख्य तथ्य इस प्रकार हैं:


मृत कर्मचारी महेंद्र सिंह ने अपने करियर की शुरुआत 28 मई 1979 को एक निचले श्रेणी के क्लर्क के रूप में की। उसके बाद, वह 1 दिसंबर 1981 से वर्क-चार्ज स्थापना में ट्यूबवेल ऑपरेटर के रूप में नियुक्त हुआ। उसका कार्यकाल विभिन्न स्थानों पर रहा और समय-समय पर उसके वेतनमान में संशोधन भी किया गया। 19 जनवरी 1985 को उसे सासाराम के माइनर इरिगेशन विभाग में वर्क सरकार के पद पर स्थानांतरित किया गया और 30 जनवरी 1986 को उसका सेवा पंजी खोली गई। दुर्भाग्य से, वह 16 अक्टूबर 2007 को अचानक दिवंगत हो गए।


बिहार सरकार का मुख्य तर्क था कि चूंकि महेंद्र सिंह ने केवल पांच वर्ष नियमित कर्मचारी के रूप में काम किया है, और नियमानुसार पेंशन प्राप्त करने के लिए 10 वर्ष की निरंतर सेवा अनिवार्य है, इसलिए उनकी विधवा सुशीला देवी को परिवार पेंशन का अधिकार नहीं मिलना चाहिए। हालांकि, सरकार के अपने ही काउंटर affidavit में स्वीकार किया गया कि महेंद्र सिंह ने कुल 22 वर्षों तक सेवा दी।


न्यायालय ने मोबीना खातून बनाम बिहार राज्य के पूर्व निर्णय का संदर्भ लिया, जिसमें वर्क-चार्ज कर्मचारियों के पेंशन अधिकारों को लेकर महत्वपूर्ण दिशानिर्देश दिए गए। न्यायालय ने निम्न निर्णय दिए:


1. जो वर्क-चार्ज कर्मचारी किसी एक पद पर 10 या अधिक वर्षों तक निरंतर सेवा दे चुके हैं, उन्हें पेंशन का अधिकार होगा।


2. जिन वर्क-चार्ज कर्मचारियों को 10 या अधिक वर्षों तक नियमित वेतनमान मिला है, उनकी मृत्यु के बाद उनके आश्रितों को मृत्यु-सह-सेवानिवृत्ति लाभ मिलेंगे।


3. हालांकि, वर्क-चार्ज कर्मचारियों के आश्रितों को सरकार द्वारा विशेष योजना न बनाए जाने की स्थिति में करुणा के आधार पर नियुक्ति का अधिकार नहीं होगा।


इस मामले में, न्यायालय ने महेंद्र सिंह की पत्नी सुशीला देवी के पक्ष में निर्णय दिया। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि महेंद्र सिंह ने 22 वर्षों तक सेवा दी है, और इसलिए उनकी विधवा को परिवार पेंशन का अधिकार मिलना चाहिए।


यह निर्णय वर्क-चार्ज कर्मचारियों के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है, क्योंकि यह उनके सेवा अधिकारों और सामाजिक सुरक्षा के संदर्भ में एक स्पष्ट मार्गदर्शन प्रदान करता है। न्यायालय ने सरकार से अपील की है कि वह इस संबंध में उचित नियम बनाए जो वर्क-चार्ज कर्मचारियों के हितों की रक्षा कर सकें।


अंत में, न्यायालय ने राज्य सरकार की अपील को खारिज कर दिया और सुशीला देवी के पक्ष में निर्णय दिया। यह निर्णय श्रमिक वर्ग के अधिकारों की रक्षा और न्याय की भावना को दर्शाता है, जहां एक कर्मचारी द्वारा लंबी अवधि तक की गई सेवा को सम्मान दिया गया।

पूरा
फैसला पढ़ने के लिए यहां
क्लिक करें:

https://patnahighcourt.gov.in/viewjudgment/MyMxNTg2IzIwMTYjMSNO—am1—-am1–LbcWlY8o4=

 

Facing a similar matter before the Patna High Court? Contact Samvida Law Associates.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recent News